दिवाली(diwali )कब है? क्या है महत्त्व? लोग क्यों मनाते हैं? क्या है लाभ?🪔🪔🙏हार्दिक शुभकामनायें 🙏🪔🪔
दिवाली (diwali )फेस्टिवल को भारत के लगभग सभी राज्यों में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। ऐसे राज्य कौन कौन से हैं? है न सोचने वाली बात 🤔🥰
🙏🌹श्री 🌹🙏
हैप्पी दिवाली -
सुख -समृद्धि का प्रतीक ज्योति पर्व है -दीपावली /दिवाली
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Happy Diwali -
स्वास्थ्य का दीपक, आरोग्य की बाती
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1. कहाँ और किस तरह से सेलिब्रेट की जाती है दिवाली?
2. दिवाली (diwali )किस तिथि को है?
3. दीपावली का महत्व क्या है?
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दीपावली पर तिथि का संयोग
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रविवार के दिन त्रयोदशी तिथि शाम 6 बजकर 04 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी।
24 तारीख को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी और अमावस्या तिथि आरंभ होगी।
अमावस्या तिथि 25 तारीख को शाम 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी।
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दीपावली का महत्व
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दीपावली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने लंकापति रावण पर विजय प्राप्त की थी और इस दिन वह 14 साल का वनवास पूरा कर अयोध्या वापस लौटे थे। भगवान राम के वापस आने के खुशी में प्रकाश का पर्व दीपावली मनाया गया। कहा जाता है कि जब भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता अयोध्या आए थे तो उनके स्वागत में लोगों ने दीप जलाए थे । दीपावली मिलन का त्योहार है इस दिन सभी लोग एक दूसरे के घर जाते हैं और मिठाई बांटते हैं।
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दीपावली के लाभ (Diwali Benefits)-🥰🥰
दीपावली की हानियाँ (Diwali Nuksaan)-🤭🤭
लखनऊ (यू. पी.) की दिवाली (diwali )-
दीपावली के शुभ अवसर पर नगर निगम द्वारा आयोजित किए गए दीपावली मेले का उत्साह लखनऊ वासियों में साफ नजर आता है | लखनऊ दिवाली मेला गोमती नदी के किनारे झूलेलाल पार्क में लगेगा,काफी बड़ी संख्या में लोग इस मेले में खरीदारी करने के लिए आते हैं |
मेले में खासगोमती नदी के किनारे और आसपास के मंदिरों को सजाया जाता है|खास यह है कि मंदिरों में लगी रंगबिरंगी लाइटें गोमती नदी के पानी में तैरती दिखती हैं |इतना ही नहीं दिवाली मेला घूमने के साथ ही रंगारंग कार्यक्रम का भी इंतजाम किया जाता है|
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नई दिल्ली की दिवाली (diwali ) -
विविधता वाले देश की राजधानी दिल्ली जहां सभी राज्यों के लोग रहते हैं,यहां त्योहारों की भीड़ में दिवाली अब भी सबका पसंदीदा त्योहार माना जाता है |दिल्ली के लोग रोशनी और संपन्नता के इस त्योहार को संपन्न लोग गरिमा से तो मनाते ही हैं, अपने वैभव का खुलकर प्रदर्शन भी करते हैं|
दिल्ली की दिवाली (diwali )बिना यहां के खास मार्केट से खरीदारी बिना पूरी हो ही नहीं सकती, चांदनी चौक के पास भागीरथ मार्किट स्थित है, यहां दीवाली के लिए झालर और लाइट का सामान बेहद ही सस्ते दाम में खरीदकर लोग ले जाते हैं|अगर आप दिवाली पर डिजाइनर कपड़े और न्यू ट्रेंडी कपड़े खरीदने की सोच रहे हैं, और वो भी बजट में, तो आपके लिए दिल्ली का लाजपत नगर स्थित सेंट्रल मार्केट जाए बिना नहीं हो सकता|दिल्ली में स्थित सदर बाजार में आपको हर तरह का सामान सस्ता और सबसे अच्छा मिल जाता है| घर सजाने का सामान हो, ड्राई फ्रूट्स हों, लाइट का सामान हो, मसाले हों आदि कुछ भी, यहां बस आपके जाने भर की देर है और उसके बाद आप अपनी पसंद और जरूरत का सामान आसानी से ले सकते हैं|
काशी / बाराणसी(यू. पी.) की दिवाली (diwali )-
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देव दीवाली कार्तिक माह की पूर्णिमा को दीपावली के पंद्रह दिन बाद मनाया जाता है। इस उत्सव का सबसे ज्यादा महत्व और आनंद उत्तर प्रदेश के शहर वाराणसी में आता है। ये प्राचीन शहर काशी की विशेष संस्कृति और परम्परा है। इस अवसर पर गंगा नदी के किनारे रविदास घाट से लेकर राजघाट तक सैंकड़ों दिये जलाकर गंगा नदी की पूजा की जाती है। कहते हैं देव दीवाली की परम्परा सबसे पहले पंचगंगा घाट पर 1915 में हजारो दिये जलाकर शुरु की गयी थी। बाद में इस प्राचीन परम्परा काशी के लोगों ने आपसी सहयोग से इसे महोत्सव में बदल कर विश्वप्रसिद्ध कर दिया। इस मौके पर असंख्य दीपकों और झालरों की रोशनी से रविदास घाट से लेकर आदि केशव घाट और वरुणा नदी के घाटों पर बने सारे देवालय, महल, भवन, मठ-आश्रम जगमगा उठते हैं। इस अदभुद नजारे को देख कर लगता है कि मानो पूरी आकाश गंगा ही जमीन पर उतर आयी हो।
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गोवा की दिवाली (diwali )-
इस राज्य में रंगोली का मेन महत्व समुद्री तट पर बसे गोवा में गोवावासियों की दीपावली देखने लायक होती है, यहाँ की पारंपरिक नृत्य और गान से शुरू होने वाली दिवाली (diwali )पर पारंपरिक व्यंजनों का
स्वाद बहुत ही खास होता है। इस राज्य में रंगोली बनाने का मेन महत्व है। इस स्टेट का दीपावली का त्योहार भी श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है, जो कि बहुत ही खास बनाता है |
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आंध्रप्रदेश की दिवाली (diwali )-
इस राज्य में भगवान हरि की कथा का संगीतमय बखान कई क्षेत्रों में किया जाता है। यहाँ के लोगों का मानना ऐसा है कि भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामाने राक्षस नरकासुर को मार डाला था इसलिए सत्यभामा की विशेष मिट्टी की मूर्तियों की प्रार्थना की जाती है।
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गुजरात की दिवाली (diwali )-
गुजरात में दिवाली नए साल के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन कोई नया उद्योग,
संपत्ति की खरीद, कार्यालय खोलना और विशेष अवसर जैसे विवाह संपन्न होना शुभ माना जाता है। गुजरात में घरों में देशी घी के दीये पूरी रातजलाए जाते हैं।
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महाराष्ट्र की दिवाली (diwali )-
महाराष्ट्र में दीपावली का त्योहार 4 दिनों तक चलता है, पहले दिन वसुर बरस मनाया जाता है जिसके दौरान आरती गाते हुए गाय और बछड़े का पूजन किया जाताहै। दूसरे दिन धनतेरस पर्व मनाया जाता है।
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कर्नाटक की दिवाली (diwali )-
इस राज्य में दिवाली के 2 दिन मुख्य रूप से मनाए जाते हैं- पहला अश्विजा कृष्ण और दूसरा बाली पदयमी जिसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है। उसे यहां अश्विजाकृष्ण चतुर्दशी कहते हैं। इस दिन लोग तेल स्नान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने नरकासुर को मारने के बाद अपने शरीर से रक्त के धब्बों कोमिटाने के लिए तेल से स्नान किया था। तीसरे दिन दिवाली के दिन को बाली पदयमी के नाम से जाना जाता है।
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हरियाणा की दिवाली (diwali )-
इस राज्य में चौराहे पर रखते चार दीपक,यहां लोग दीपावली कुछ अलग ही ढंग से मनाया करते हैं। घर की दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाई जाती है जिस पर घर के हर सदस्य का नाम लिखा जाता है।
उसके बाद पूरे आंगन को मोमबत्तियों और दीयों से सजाया जाता है। हर घर से 4 दीपक चौराहे पर रखे जाते हैं जिसे टोना कहते हैं।
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पूर्वोत्तर की दिवाली (diwali )-
पूर्वी भारत में इस दिन दीये तो जलाए ही जाते हैं, साथ ही पारंपरिक नृत्य को भी महत्व दिया जाता है। यहां प्रकाश करते लोग अपने घरों के दरवाजे खुले रखते हैंजिससे कि देवी लक्ष्मी प्रवेश कर सकें, क्योंकि देवी लक्ष्मी अंधेरे घर में प्रवेश नहीं करती हैं।
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पश्चिम बंगाल की दिवाली (diwali )-
इसकी तैयारी 15 दिन पहले से शुरू कर दी जाती है।दिवाली (diwali )की मध्यरात्रि में लोग महाकाली की पूजा-अर्चना करते हैं।
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ओडिशा की दिवाली (diwali )-
यहाँ आद्य काली पूजा का खासा महत्व है।
तमिलनाडु की दिवाली (diwali ) -
इस राज्य में नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व है |
यहां दीपावली का पर्व तो मनाया ही जाता है लेकिन सबसे ज्यादा महत्व दिवाली के 1 दिन पूर्व मनाए जाने वाले नरक चतुर्दशी का है। यहां मात्र 2 दिन का उत्सवहोता है। इस दिन दीपक जलाने, रंगोली बनाने और नरक चतुर्दशी पर पारंपरिक स्नान करने का ही ज्यादा महत्व दिया जाता है।
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Conclusion -
मै आशा करता हूँ कि आपको Diwali पर लिखे गए आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा।
सभी पाठको को हमारी ओर से happy diwali और मैं कामना करता हूँ कि भगवान गणेश और माता जी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।
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