Navratri Mahanavami 2022:
Sidhidatri Mata|Maa Sidhidatri | Maa Sidhidatri Puja Vidhi |Mantra | Katha
हेलो भक्तों क्या आपको जानकारी है...
कौन हैं मां सिद्धिदात्री?कौन हैं मां सिद्धिदात्री?क्या है इनकी महिमा? भगवान शिव क्यों करते हैं उपासना? देव गण क्यों करते हैं उपासना?
तो आइये मै आपको जानकारी देता हूँ कि कौन हैं माँ सिद्धिदात्री...
भक्तों भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही 8 सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। माँ सिद्धिदात्री की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना।और हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। भक्तों मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से अष्ट सिद्धि और नव निधि की प्राप्ति होती है।
Sidhidatri Mata|Maa Sidhidatri |Katha
माँ भगवती सिद्धिदात्री...
मां सिद्धिदात्री का रूप:
कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं। इनके चारों हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल रहता है। सिर पर ऊंचा सा मुकूट और चेहरे पर मंद मुस्कान ही मां सिद्धिदात्री की पहचान है।
माँ की महिमा...
नव दुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अन्तिम हैं। अन्य आठ (शैलपुत्री, ब्रम्भचारनी, चंद्रघंटा, कुशमांडा, स्कन्दमाता, कात्यानी, कालरात्रि, महागौरी )दुर्गाओं की पूजा-उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा-पूजा के नवें दिन इनकी उपासना में प्रवृत्त होते हैं। सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।ऐसा शास्त्रों में कहा गया है |
लेकिन सिद्धिदात्री माँ के कृपा मात्र से भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण न हो ।भक्तों माँ भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती।
भक्तों सभी सिद्धियों को देने वाली माता कृपालु, दयालु तथा भक्त वत्सल हैं।
जय श्री दुर्गा, अम्बिका, शिवा सुमंगल रूप | जय अम्बे, जय चंडिका, महिमा अमित अनूप ||
Sidhidatri Mata|Maa Sidhidatri | Maa Sidhidatri Puja Vidhi |Mantra
मंत्र इस प्रकार है :
'ॐ सिद्धिदात्र्यै नम:।'
'विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा:
स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्
का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।'
- स्वर्ग तथा मोक्ष पाने हेतु निम्न मंत्र का जप करें। पत्र, पुष्प, तिल, घृत होम द्रव्य हैं।
'सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्ति प्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः।।'
भूमि, मकान की इच्छा रखने वाले निम्न मंत्र को जपें। साधारण द्रव्य होम के लिए प्रयुक्त करें।
'गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तुते।।'
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले व्यक्ति, स्त्री या पुरुष निम्न मंत्र का जप करें।
नन्दगोप गृहे जाता यशोदा-गर्भ-सम्भवा।
ततस्तौ नाशयिष्यामि, विन्ध्याचल निवासिनी।।'
- घृत व मक्खन से आहुति दें। इच्छा अवश्य पूर्ण होगी।
भक्तों इस प्रकार देवी के पूजन, अर्चन, जप इत्यादि में समय का अवश्य ध्यान रखें अन्यथा कृपा प्राप्त न होगी। नैवेद्य जरूर चढ़ाएं तथा प्रार्थना करें।
भक्तों पूजन-अर्चन के पश्चात हवन, कुमारी पूजन, अर्चन, भोजन, ब्राह्मण भोजन करवाकर पूर्ण होता है।
समस्त भक्तों में मातृभाव रखने हेतु मां का मंत्र जपा जाता है जिससे देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
खास बात ये भी है कि...
Sidhidatri Mata|Maa Sidhidatri | Maa Sidhidatri Puja Vidhi
नैवेद्य-
भक्तों नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही अनहोनी होने की घटनाओं से बचाव भी होता है।
नोट -
माँ प्रेम की भूखी होती हैं जो भक्त सच्चे मन और भक्ति भाव से भजता है या उपासना करता है उसके ऊपर माँ की दया दृष्टि हमेशा बनी रहती है | जब माँ की ही दया दृष्टि रहती है तब भक्त हर प्रकार से समृद्धिवान, सामर्थ्यवान और खुशहाल बना रहता है |







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